नई दिल्ली
: कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सोमवार को लोकसभा में 'वन नेशन वन इलेक्शन' (एक राष्ट्र, एक चुनाव) बिल पेश करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इस विधेयक को चर्चा और आम सहमति बनाने के लिए
संयुक्त संसदीय समिति (JPC)
को भेजा जाएगा। जेपीसी विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ चर्चा करेगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।अर्जुन राम मेघवाल ने भारत के संविधान में संशोधन के लिए विधेयक पेश करने की अनुमति मांगी है। यह विधेयक
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने
और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, तथा पुडुचेरी के चुनावों को एक साथ कराने से संबंधित है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 भी पेश करने का प्रस्ताव रखा है।
विपक्ष ने साधा निशाना
'वन नेशन वन इलेक्शन' प्रस्ताव पर विपक्षी दलों ने इसे
अव्यावहारिक
और संघवाद पर हमला बताया है।
दिग्विजय सिंह
: कांग्रेस नेता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर किसी राज्य में सरकार गिर जाती है, तो क्या वह राज्य 4.5 साल तक बिना सरकार के रह पाएगा? उन्होंने इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताया।
जयराम रमेश
: कांग्रेस सांसद ने इस विधेयक को लोकतंत्र को कमजोर करने वाला करार दिया और इसे संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की मांग की।
कांग्रेस पार्टी ने पहले भी इस विधेयक का विरोध किया था। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति को चार पन्नों का पत्र लिखकर अपने विचार स्पष्ट किए थे।
समर्थन और विरोध का आंकड़ा
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित समिति ने बताया कि
32 राजनीतिक दलों ने इस बिल का समर्थन
किया है, जबकि
15 दलों ने विरोध
जताया है।
'वन नेशन वन इलेक्शन' का उद्देश्य
सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य अगले
100 दिनों में लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय और पंचायत चुनाव
एक साथ कराना है। इससे चुनावी खर्च में कटौती और प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाने की उम्मीद है।