: छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय चुनाव 2025: रायपुर निगम का 158 साल पुराना इतिहास, सिर्फ एक बार बीजेपी का रहा महापौर
रायपुर नगर निगम, जो छत्तीसगढ़ की राजधानी का प्रमुख शहरी प्रशासनिक निकाय है, अपने 158 साल के लंबे इतिहास में राजनीतिक बदलावों और घटनाओं का गवाह रहा है। इस नगर निगम के चुनावों में हमेशा कांग्रेस का दबदबा रहा है, और अब तक केवल एक बार भाजपा महापौर पद पर काबिज हो पाई है।
158 साल का गौरवशाली इतिहास
रायपुर नगर निगम की स्थापना ब्रिटिश शासन के दौरान 1867 में हुई थी। यह छत्तीसगढ़ के सबसे पुराने नगर निगमों में से एक है। आज यह निगम 70 वार्डों के तहत लाखों निवासियों को सेवाएं प्रदान करता है।राजनीतिक परिदृश्य पर कांग्रेस का प्रभुत्व
रायपुर नगर निगम के महापौर पद पर सबसे ज्यादा बार कांग्रेस के उम्मीदवार विजयी रहे हैं।
भाजपा का प्रदर्शन: 158 साल के इतिहास में सिर्फ एक बार भाजपा के उम्मीदवार को महापौर पद पर जीत हासिल हुई थी।
क्षेत्रीय दल और निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रभाव कभी-कभी दिखा है, लेकिन कांग्रेस की पकड़ हमेशा मजबूत रही है।
महापौर का चयन और रायपुर का विकास
रायपुर के महापौर का चुनाव सीधे जनता के वोट से होता है।
महापौर का पद शहर के बुनियादी ढांचे और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाता है।
बीते सालों में महापौरों ने सड़क निर्माण, जल आपूर्ति, सफाई अभियान और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में योगदान दिया है।
2025 चुनाव पर नजरें
इस बार के नगरीय निकाय चुनाव में रायपुर नगर निगम एक बार फिर से राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। कांग्रेस जहां अपना गढ़ बचाने की कोशिश में है, वहीं भाजपा इतिहास दोहराने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।चुनावी मुद्दे
बुनियादी सुविधाएं: सड़क, पानी और बिजली।
स्वच्छता अभियान: रायपुर को स्वच्छता रैंकिंग में ऊपर लाने का प्रयास।
युवाओं और महिलाओं के लिए योजनाएं: शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा।
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