: पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय:

Admin Wed, Jul 10, 2024

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा केंद्रीय सरकार के उस निर्देश के खिलाफ दायर याचिका को कानूनी रूप से सही माना, जिसमें सीबीआई को राज्य के क्षेत्राधिकार में जांच करने की अनुमति दी गई थी।जस्टिस बी.आर. गवई और संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका,जिसमें राज्य की सहमति वापस लेने के बावजूद सीबीआई द्वारा मामलों की जांच की जा रही है |कानून के अनुसार अपनी योग्यता पर आगे बढ़ेगी।शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार की सीबीआई जांच से संबंधित याचिका को 13 अगस्त को मुद्दों के निर्धारण के लिए सूचीबद्ध किया है।बंगाल सरकार ने 2018 में केंद्रीय एजेंसी को जांच के लिए दी गई अपनी सामान्य सहमति वापस लेने के बाद भी मामलों को दर्ज करने के लिए सीबीआई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को ममता बनर्जी सरकार द्वारा दायर याचिका की स्वीकार्यता पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था।पश्चिम बंगाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया था |कि 16 नवंबर, 2018 को राज्य की सहमति वापस लेने के बाद,केंद्र सरकार सीबीआई को राज्य में जांच करने की अनुमति नहीं दे सकती थी।central की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि -केंद्र सरकार या उसके विभाग सीबीआई जांच पर कोई पर्यवेक्षी नियंत्रण नहीं रखते हैं।

West Bengal Government की याचिका का कानूनी आधार

यह मामला पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे पर आधारित है।2018 में पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को राज्य में जांच करने के लिए दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी।इसके बावजूद, सीबीआई ने राज्य में मामलों की जांच जारी रखी।इस पर पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटायाऔर याचिका दायर की कि राज्य की सहमति के बिना सीबीआई जांच नहीं कर सकती।

 सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस याचिका को कानूनी रूप से सही माना और इसे आगे बढ़ने की अनुमति दी।जस्टिस बी.आर. गवई और संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका अपने कानूनी आधार पर आगे बढ़ेगी ,और इस पर 13 अगस्त को मुद्दों के निर्धारण के लिए सुनवाई होगी।यह निर्णय पश्चिम बंगाल सरकार के पक्ष में एक महत्वपूर्ण जीत है |जो यह साबित करता है कि राज्य की सहमति के बिना केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच की अनुमति नहीं दी जा सकती।

कानूनी दृष्टिकोण

इस मामले में कानूनी दृष्टिकोण से यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार की सहमति केंद्रीय एजेंसियों की जांच के लिए आवश्यक है।पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया था |कि एक बार जब राज्य ने अपनी सहमति वापस ले ली,तो केन्द्र सरकार को सीबीआई को राज्य में जांच करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।

केन्द्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि -

केंद्र सरकार या उसके विभाग सीबीआई जांच पर कोई पर्यवेक्षी नियंत्रण नहीं रखते हैं |लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए याचिका को कानूनी रूप से सही माना।छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता: 

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