: अन्ना नगर नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने गठित की नई SIT
Admin Tue, Nov 19, 2024
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अन्ना नगर में हुए नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। यह टीम दो महिला आईपीएस अधिकारियों सहित तीन अधिकारियों से मिलकर बनाई गई है। इन अधिकारियों का संबंध तमिलनाडु से नहीं है।
SIT के सदस्यों का परिचयजस्टिस सूर्यकांत और उज्जल भुयान की खंडपीठ ने यह नई SIT गठित की है। इसमें तीन आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया गया है: 1. सरोज कुमार ठाकुर - डीआईजी, पूर्वी क्षेत्र के संयुक्त पुलिस आयुक्त (बिहार)। 2. अयमान जमाल - एसपी, कानून और व्यवस्था, अवाडी पुलिस आयुक्तालय (उत्तर प्रदेश)। 3. ब्रिंदा - एसपी, कानून और व्यवस्था, उत्तरी सलेम सिटी (कर्नाटक)।जांच के दिशा-निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि यह SIT निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से जांच करेगी।टीम की रिपोर्ट मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सौंपी जाएगी।इसके बाद मुख्य न्यायाधीश आवश्यकता महसूस होने पर एक विशेष पीठ का गठन कर सकते हैं।SIT को निर्देश दिया गया हैकि वह अपनी जांच की प्रगति की साप्ताहिक रिपोर्ट विशेष पीठ को प्रस्तुत करे।जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए यह प्रक्रिया जारी रहेगी।CBI जांच पर रोकहाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के 1 अक्टूबर को दिए गए आदेश पर रोक लगाई थी,जिसमें मामले की जांच अन्ना नगर ऑल-वुमेन पुलिस स्टेशन से सीबीआई को सौंपने के निर्देश दिए गए थे।11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में कहा थाकि हाईकोर्ट द्वारा जांच को सीबीआई को सौंपने के निर्देश फिलहाल प्रभावी नहीं रहेंगे।इसके बजाय, तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया गया कि वह पांच से सात आईपीएस अधिकारियों की सूची प्रस्तुत करे।ये अधिकारी अन्य राज्यों से हों,लेकिन तमिलनाडु कैडर में सेवा दे रहे हों।इसमें तीन महिला अधिकारी होनी चाहिए।उनके पद, वर्तमान तैनाती और मूल राज्य का विवरण भी प्रस्तुत करना होगा।मामले की संवेदनशीलता और निष्पक्षता पर जोरसुप्रीम कोर्ट ने जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए तमिलनाडु से बाहर के अधिकारियों को शामिल किया है।इसके पीछे उद्देश्य है कि मामले में किसी भी प्रकार का पूर्वाग्रह न रहे।तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अधिवक्ता डी. कुमनन ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की।सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित यह SIT मामले की सटीक और निष्पक्ष जांच का आश्वासन देती है। अदालत के इस कदम से यह स्पष्ट है कि वह यौन उत्पीड़न के मामलों में त्वरित और प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। जांच के निष्कर्ष आने तक यह मामला कानूनी और सामाजिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बना रहेगा।
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