: अग्निपथ योजना पर राहुल गांधी का विरोध और सरकार की नई पहल

Admin Sat, Jun 15, 2024

27 मई 2024 को बिहार के बख्तियारपुर में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनावी रैली में वादा किया कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो अग्निपथ योजना को समाप्त कर दिया जाएगा। 2024 के चुनाव में राहुल गांधी ने लगभग हर रैली में अग्निपथ योजना का मुद्दा उठाया। हालांकि, कांग्रेस सत्ता में नहीं आई, लेकिन एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरकर सामने आई।

नतीजों के बाद 11 जून को राहुल गांधी ने कहा, "विपक्ष में 'सेना' बैठी है। हम अग्निपथ योजना को रद्द करवाकर रहेंगे।"

सरकार ने विपक्ष की आलोचना को गंभीरता से लिया और अग्निपथ योजना में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके लिए एक रिव्यू ग्रुप का गठन किया गया है, जो योजना की कमियों और सुधार पर सुझाव देगा। सरकार इन सुझावों को लागू करने का प्रयास करेगी ताकि युवाओं और विपक्ष की नाराजगी को दूर किया जा सके।

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अग्निपथ योजना: उद्देश्य और प्रारंभिक जानकारी

अग्निपथ योजना की शुरुआत 2022 में की गई थी, जिसके तहत आर्मी, नेवी और एयर फोर्स में चार साल के लिए युवाओं को कॉन्ट्रैक्ट पर भर्ती किया जाता है। इस योजना में चार साल की सेवा अवधि में छह महीने की ट्रेनिंग शामिल है। सेवा समाप्ति के बाद, 25% जवानों को परमानेंट सर्विस में लिया जाएगा, जबकि बाकी लोग सिविल दुनिया में लौट जाएंगे। भर्ती प्रक्रिया साल में दो बार रैली के माध्यम से की जाती है। इसमें भर्ती होने वाले जवानों की उम्र 17.5 से 21 साल और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास होनी चाहिए।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली मेंसरकार का मानना है कि इस योजना से युवाओं को रोजगार मिलेगा और सेना की औसत आयु कम की जा सकेगी। इसके अलावा, नई पीढ़ी के सैनिकों के आने से सेना तकनीकी रूप से समृद्ध और आधुनिक होगी। जब ये जवान सेवा समाप्ति के बाद समाज में लौटेंगे, तो समाज को एक अनुशासित और कुशल युवाओं की फौज मिलेगी।
 योजना की प्रमुख कमियाँ
कुछ विशेषज्ञों के अनुसार अग्निपथ योजना में कई कमियाँ हैं, जिनमें शामिल हैं:1. अस्थायी रोजगार: जवानों को केवल चार साल के लिए भर्ती किया जाता है, जिसमें से केवल 25% को ही स्थायी सेवा मिलती है। 2. करियर में स्थायित्व नहीं:चार साल की सेवा के बाद, अधिकांश जवानों को नए करियर की तलाश करनी पड़ती है। 3. अपूर्ण सैनिक: चार साल की छोटी अवधि में जवान पूरी तरह से प्रशिक्षित सैनिक नहीं बन पाते हैं। 4. दूसरी नौकरी की गारंटी नहीं:अग्निवीरों को अर्धसैनिक बलों या पुलिस बलों में भर्ती की गारंटी नहीं होती। 5. मोटिवेशन और मॉरल पर असर:चार साल की सेवा अवधि जवानों के मोटिवेशन और मॉरल पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
संभावित सुधार और बदलाव
सरकार अग्निपथ योजना में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव कर सकती है, जैसे:

- आयु  बदलावसीमा में: अभी की 17.5 से 21 साल की आयु सीमा को बढ़ाकर 17.5 से 23 साल किया जा सकता है।

- परमानेंट सर्विस का प्रतिशत: चार साल बाद स्थायी सेवा में शामिल होने वाले जवानों का प्रतिशत 25% से बढ़ाकर 70% किया जा सकता है।

- सेवा अवधि में वृद्धि:नौकरी की अवधि को 4 साल से बढ़ाकर 7 साल किया जा सकता है।

- ट्रेनिंग अवधि में बदलाव: प्रशिक्षण अवधि को 24 सप्ताह से बढ़ाकर 35 से 50 सप्ताह किया जा सकता है।

- विशेष लाभ: सेवा के दौरान विकलांगता या मृत्यु के मामलों में विशेष लाभ प्रदान किए जा सकते हैं।

-पूर्व सैनिक का दर्जा: अग्निवीरों को पूर्व सैनिक का दर्जा दिया जा सकता है।

- नौकरी खोजने में सहायता: एक पेशेवर एजेंसी बनाई जा सकती है, जो सेवा समाप्ति के बाद अग्निवीरों को नौकरी खोजने में मदद करेगी।

 सरकार की प्रतिक्रिया
नई सरकार ने अग्निपथ योजना में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 10 प्रमुख मंत्रालयों के सचिवों का एक ग्रुप बनाया गया है, जो योजना की समीक्षा करेगा और सुधार के सुझाव देगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के इटली से लौटने के दो-तीन दिन के भीतर यह रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सकती है।सरकार चुनाव में हुए नुकसान को देखते हुए इस योजना में सुधार के लिए गंभीर है और अगले 100 दिनों के भीतर सुधार के सुझावों को लागू करने का प्रयास करेगी। 

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