: विजयादशमी पर भिलाई में आरएसएस का पथ संचलन, बारिश में भी डटे रहे स्वयंसेवक
Admin Wed, Oct 23, 2024
हर साल की तरह इस साल भी विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भिलाई में पथ संचलन का आयोजन किया। इस आयोजन के दौरान स्वयंसेवकों का स्वागत "भारत माता की जय" और "जय श्री राम" जैसे नारों से किया गया। इस संचलन की अगुवाई जिला सह-कार्यकर्ता दुश्यंत साहू ने की, जिन्होंने स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में जिला संपर्क प्रमुख मनीष सोनी, नगर कार्यकर्ता दीनबंधु, मुख्य शिक्षक राजेश निषाद और प्रबंधन प्रमुख विनोद अग्रवाल भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम की जानकारी प्रचार प्रमुख आनंद नारायण ओझा ने दी।
पथ संचलन का रूट और प्रमुख अतिथियों की उपस्थितिराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पथ संचलन सेक्टर 7 के माता मंदिर से शुरू हुआ और रूसी कॉम्प्लेक्स, सेंट्रल एवेन्यू और चर्च के पास से गुजरते हुए माता मंदिर के मैदान में समाप्त हुआ।इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय संघचालक डॉ. पुरेंद्रु सक्सेना और नगर संघचालक रामजी साहू मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे,जबकि तेलुगू समुदाय से माताधाम मंदिर के अध्यक्ष नीलम चिन्ना केशवुलु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।बारिश के बावजूद स्वयंसेवकों का जज्बापथ संचलन के दौरान बारिश और बिजली गिरने के बावजूद स्वयंसेवक अपने स्थान पर डटे रहे,जिससे उनके अनुशासन और समर्पण की झलक मिली।स्वयंसेवकों ने पूरे उत्साह के साथ संचलन में भाग लिया और यह सुनिश्चित किया कि कार्यक्रम सफलता पूर्वक संपन्न हो।मुख्य वक्ता की प्रेरणादायक बातेंकार्यक्रम के मुख्य वक्ता क्षेत्रीय संघचालक डॉ. पुरेंद्रु सक्सेना ने शस्त्र पूजन के बाद सभा को संबोधित किया।अपने भाषण में उन्होंने परिवार और पर्यावरण की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया।उन्होंने भारत की महान संस्कृति का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे हमारे परिवार एक माला की तरह जुड़े हुए हैं।अगर हमारा परिवार और समाज स्वस्थ और एकजुट रहेगा, तो भारत एक बार फिर से विश्व गुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।सम्मान और आभार व्यक्ततेलुगू समुदाय के नीलम चिन्ना केशवुलु ने संघ को सम्मान देने के लिए धन्यवाद दिया और संघ की इस पहल की सराहना की।उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में एकता और अनुशासन को बढ़ावा देते हैं।समाज और राष्ट्र के प्रति संघ का योगदानइस कार्यक्रम के माध्यम से आरएसएस ने न केवल भारतीय संस्कृति और परिवारिक मूल्यों को उजागर किया, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी दोहराई। संघ के स्वयंसेवकों का समर्पण और समाज को एकजुट रखने का उनका प्रयास भविष्य में भी सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार साबित होगा।
यह पथ संचलन इस बात का प्रतीक था कि चाहे कोई भी परिस्थिति हो, संघ के स्वयंसेवक हमेशा समाज और राष्ट्र की सेवा में तत्पर रहते हैं।विज्ञापन